सम्प्रदाय की राजनीति

हाल ही में एक समाचार पत्र में   प्रकाशित समाचार ' पार्षद  द्वारा धार्मिक स्थल का दौरा कर हाल जाना गया' ने मुझे विचार रखने पर विवश किया । यही नहीं माननीय  प्रधानमंत्री द्वारा किये गये  पूरे भारत वासियों से प्रकाश प्रदीप्त के आह्वान के गहरे भाव को समझे बिना प्रचार को पुनः हथियार बनाते हुये पार्षद महोदय ही नहीं अन्य जन नेता कहलाने की इच्छा रखने वाले तथाकथित कुछ लोग समूहों में  मशाल के साथ और air fire  करते   सडक पर उतरे ।
   लाकॅ डाउन के समय  इन सभी की गतिविधियाँ अलग ही संदेश दे रही हैं । सम्प्रदाय विशेष के स्थल का दौरा,तथा सडक पर distancing के विरूद्ध उतरना   गरिमा के विपरीत है । इससे कई प्रश्न खड़े होते हैं । आज जब  सभी समझदार भारतीय नागरिक उचित अनुचित के अन्तर को समझ रहे हैं ऐसे में यह व्यवहार अपरिपक्वता का परिचय देता है।  समझना होगा कि हम सभी सर्वप्रथम  देश के नागरिक और किसी राज्य के निवासी हैं । इसी रूप में सभी को  देखा जाना चाहिए ।  भारत सरकार, अन्य राज्य सरकारें और देश भर की स्वास्थ्य और निजी  सेवा संस्थाएँ  जिस प्रकार धर्म जाती को ध्यान में न रखते हुए आम आदमी  की स्वास्थ्य  समस्या समाधान,  सहायता व सुविधा का ध्यान रख रही हैं वह प्रशंसनीय और स्तुति योग्य है ।आने वाले हर दिन भारत के लिए परीक्षा की घड़ी है।  सभी से अपेक्षा है  कि वे वर्ग विशेष से जुड़े बिना सामान्य रूप से यथावत अपनी 'पर हिताय' भूमिका को निभायेंगे।
                       डॉ सुरभि 

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