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मन की कलम से

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हिंदी महाविद्यालय गीत

⚘हिंदी महाविद्यालय गीत⚘               🦚 🦢🦚 दक्षिण भूमि पर दमक रहा---     थामे ज्ञान पताका---  भाग्यनगर की भाग्यरेखा  हिंदी का  आलय, हर भाषा का संगम   यह महाविद्यालय हिंदी महाविद्यालय  भाग्यनगर की भाग्यरेखा-- विशाल भव्य  भवन है इसका हृदय रखता विशाल,  विद्या बुद्धि तेज बल का       देता आधार त्याग तप की पुण्य भूमि-2    शारदा का  मंदिर  गर्व हमें है इस मंदिर पर      यही पावन उद्यान, प्रतिभा पुष्प खिला है इस पर, खिला पुष्प विश्वास  भाग्यनगर की भाग्यरेखा-- प्रगति पथ पर बढें सभी   संस्कारों से निर्मित  दया उदारता धैर्य प्रेम के     मनकों से सुशोभित  श्रम कौशल की शिक्षा पाकर     भविष्य हो प्रकाशित,     लेकर शुभ लक्ष्य       संकल्प यही      बढ रहा संस्थान   भाग्यनगर की भाग्यरेखा--  हर शिला गाती यश इसका-2 गाती गाथा स्वर्णिम,  ज्ञान दीप जलाया इसने त...

करुणामयी प्रकृति

🦚करुणामयी प्रकृति 🦚 प्रकृति का रूप सलोना नयनाभिराम हरित धरा नीचे ऊपर व्योम विशाल गृह नक्षत्र रचते नभ संसार! नीलाम्बर छूते सघन तरु वृक्ष- वृक्ष खग वृंद कोयल की मधुर कूक सुन बोल उठती मृदंग  मन मयूर नाच उठता बहती जब सुरभि अनिल रंग-बिरंगी देख तितलियाँ प्रसून सम खिल जाता मन  वनचर विचरते जब जंगम हो जाता वन कुलाचे भरता भाता हिरण लहरों पर करते नर्तन जब जलचर किलक उठता बचपन अचल के आँचल तले    लहराते देख धान   कृषक मस्तक दमकते    तब स्वेद कण !  बज उठती जलतरंग ज्ञान मेरा सीमित सही  जाना है पर मैंने- रवि शशि तारागण अनिल अनल विद्युत किरण नियन्ता के नियम बद्ध गतिमान सब जगत् के हैं देव रक्षक  इन्द्र वरूण सोम प्रकृति कर रही सूत्र संचालन! तोड नियम नियन्ता का मिटा रहा मनुज  सुख - शांति पावन लोभ-मोह के नागपाश से मूर्छित है चेतन काम-क्रोध के जटिल जाल से  बुन रह अभिशप्त जीवन संतप्त प्रकृति-  खो रही संतुलन! एक ओर जलाजल एक ओर सूखा स्थल भग्न हुआ कहीं- हृदय अवनी का कहीं हुई वह जल मग्न !  संख्या विस्फोट ने   काटे वन, उजाडे घर व्याधियों न...

माँ

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🌷 जन्मदिवस 5 मई 🌷 माँ एक निश्छल मुस्कान* ----एक स्मृति जो कभी विस्मृत नहीं हो सकती--- "जिस शब्द में सारा संसार सिमटा है" मेरी माँ-- *जिसका जीवन ही यज्ञ रहा* *अनुशासन, व्यवस्था ,नियम, सत्य वादन और लक्ष्य साधना  जिसके जीवन के पाँच मूल्य रहे* *जिसने असम्भव को संभव में परिणत किया,*  *असफलताओं और निराशा को अपने पर कभी हावी नहीं  होने दिया* * छः वर्ष की आयु में  माता-पिता की छाया से वंचित संघर्षों के मार्ग पर चलते हुऐ शिक्षा पूर्ण कर   स्वतः  अपना निर्माण किया ,अपने व्यक्तित्व को  ऊँचा उठाया*,   *पिताजी के साथ मिल कर हमारी उँगली थाम, मार्ग कंटक विहीन कर उस पगडंडी पर लेकर बढीं जिसने  हमें सफलता तक पहुँचाया*।*मुझ जैसे कच्चे घडे को तराशा आत्मनिर्भर  बनाया* मुझे याद है माँ की वह ममता भरी आँखे  जब हमारी  उपलब्धि  पर  भीगी' और  दुख में छलकीं। *पत्नी,  माँ,  शिक्षक, ओजस्वी वक्ता , सशक्त लेखन,आर्य समाज प्रधाना,दादी- नानी हर रूप  के साथ माँ का तेज बढा। * हमें अपनी माँ पर सदा गर्व रहा कि उनकी  निस...

कोरोना और मदिरा

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कोरोना और मदिरा

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