हिंदी राष्ट्रभाषा से विश्व भाषा तक
माँ सरस्वती की असीम कृपा से 'अक्षय तृतीया' के पावन दिन अपनी दूसरी प्रकाशित 'हिंदी राष्ट्रभाषा से विश्व भाषा' पुस्तक सुधि पाठकों के समक्ष प्रस्तुत कर रही हूँ ।🙏
कानपुर, विकास प्रकाशन के श्री पंकज वाजपेयी के द्वारा यह 25 दिन पूर्व हैदराबाद पहुँच गयी थी ।
लाकडाउन के कारण मैं उन तक और वे मुझ तक नहीं पहुंच सकीं ।
परंतु कठिन प्रयास से आज संभव बन पडा और कालेज जहाँ नव प्रकाशित पुस्तक का बण्डल मेरी प्रतीक्षा कर रहा था जाना संभव हुआ।
अब तक पुस्तक हाथ में पहुँचेगी या नहीँ इसी निराशा की स्थिति में थी।और जब हाथ में प्रति आई तो अविश्वास मिश्रित हर्ष हुआ । संभवतः वह भी उचित समय की प्रतीक्षा कर रही थी😊
अपनी भावना व्यक्त करने के लिये पुस्तक से एक वाक्य उद्धृत कर रही हूँ----
"हिंदी का ज्ञान मेरे लिये अमृतपान है, जितनी बार उसे पीता हूँ, उतनी बार लगता है पुनः जीता हूँ "