प्रकाश पुंज

जाग उठी जगती 
करती गायन मधुर 
प्रणम तुम्हें अर्क देव
हर लो व्याधि सकल
हे आराध्य प्राणदाता!
 हर प्राणी आज अधीर
आशीष हस्त रखदो शीश✍

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