23अप्रैल पुस्तक दिवस पर

23 अप्रैल पुस्तक दिवस पर--'  पुस्तकें, पत्रिकायें  और मेरा बचपन🙋‍♀️
कुछ यादें  जिनकी  मिठास आज भी साथ  हैं 🍬
फैन्टम/बेताल मेन्ड्रेक पुस्तकें  अलीगढ़ में जीजी जीजाजी(भटनागर परिवार) के  घर पर पढीं । पुरानी प्रतियों से लेकर नयी 'सभी' । 
दिल्ली में घर पर नियमित रूप से विज्ञान पत्रिका ,चंदामामा, रामायण और महाभारत सचित्र कथा,
नन्दन , पराग, चंपक,रूसी और भारतीय लोक कथाएँ, चाचा चौधरी,  लोटपोट और समय के साथ  धर्मयुग, साप्ताहिक हिन्दुस्तान , ये सभी गर्मी की छुट्टियों की वो शांत दोपहर याद दिलाती हैं जब आँख में नींद  की जगह कहानियाँ होती थीं और हाथों में पुस्तक, पत्रिकायें  । दोपहर और रात का खाना भी इन्हें पढे बिना नहीं पचता था। एक-एक पन्ना मुझसे जैसे बात करता था☺️😍
 इन पत्रिकाओं की  सुगंध अभी भी सांसों में बह रही है ⚘🌷
माँ- पिताजी, जीजी- जीजाजी   सभी को सश्रद्धा नमन जिन्होंने पुस्तकों के संसार से मुझे परिचित कराया और  इन्हें  मेरा मित्र बनाया📚✏
आज तक इन मित्रों ने मेरा साथ नहीं छोडा है।😌🙏

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